श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  11.2.9 
यथा वायुस्तृणाग्राणि संवर्तयति सर्वश:।
तथा कालवशं यान्ति भूतानि भरतर्षभ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जैसे वायु चलती है और तिनकों को चारों ओर बिखेर देती है, उसी प्रकार काल के प्रभाव से समस्त प्राणी आते-जाते रहते हैं॥9॥
 
O best of the Bharatas! Just as the wind blows and scatters straws all around, in the same way all creatures come and go under the influence of time.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)