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यथा वायुस्तृणाग्राणि संवर्तयति सर्वश:।
तथा कालवशं यान्ति भूतानि भरतर्षभ॥ ९॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जैसे वायु चलती है और तिनकों को चारों ओर बिखेर देती है, उसी प्रकार काल के प्रभाव से समस्त प्राणी आते-जाते रहते हैं॥9॥
O best of the Bharatas! Just as the wind blows and scatters straws all around, in the same way all creatures come and go under the influence of time.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥