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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना
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श्लोक 8
श्लोक
11.2.8
काल: कर्षति भूतानि सर्वाणि विविधान्युत।
न कालस्य प्रिय: कश्चिन्न द्वेष्य: कुरुसत्तम॥ ८॥
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! काल नाना प्रकार के समस्त प्राणियों को खींच लेता है। काल को न तो कोई प्रिय है और न ही कोई उसके द्वेष का पात्र है।॥8॥
O best of the Kurus! Time pulls away all living beings of various kinds. Neither anyone is dear to Time nor anyone is deserving of its hatred. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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