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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना
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श्लोक 5
श्लोक
11.2.5
अयुध्यमानो म्रियते युध्यमानश्च जीवति।
कालं प्राप्य महाराज न कश्चिदतिवर्तते॥ ५॥
अनुवाद
महाराज! जो युद्ध नहीं करता, वह भी मरता है और जो युद्ध में लड़ता है, वह भी जीवित रहता है। मृत्यु को पाकर कोई उसे परास्त नहीं कर सकता॥5॥
Maharaj! One who does not fight also dies and one who fights in the war also survives. No one can defeat death after getting it. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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