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mahabharat 11.2.37: तुम्हारे समान बुद्धिमान पुरुष बुद्धि के विपरीत कर्मों में प्रवृत्त नहीं होता, जो अनेक विनाशकारी दोषों से युक्त हैं और मूल शरीर को भी नष्ट कर देते हैं ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 11.2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  11.2.37 
न हि ज्ञानविरुद्धेषु बह्वपायेषु कर्मसु।
मूलघातिषु सज्जन्ते बुद्धिमन्तो भवद्विधा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे समान बुद्धिमान पुरुष बुद्धि के विपरीत कर्मों में प्रवृत्त नहीं होता, जो अनेक विनाशकारी दोषों से युक्त हैं और मूल शरीर को भी नष्ट कर देते हैं ॥37॥
 
An intelligent person like you does not indulge in activities contrary to the intellect, which are full of many destructive defects and destroy even the basic body. 37॥
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि धृतराष्ट्रविशोककरणे द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें धृतराष्ट्रके शोकका निवारणविषयक दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)