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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना
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श्लोक 32
श्लोक
11.2.32
शयानं चानुशेते हि तिष्ठन्तं चानुतिष्ठति।
अनुधावति धावन्तं कर्म पूर्वकृतं नरम्॥ ३२॥
अनुवाद
मनुष्य के पूर्वकर्म जब वह सोता है तो उसके साथ सोते हैं, जब वह जागता है तो उसके साथ जागते हैं और जब वह दौड़ता है तो उसके साथ दौड़ते हैं ॥32॥
A man's past deeds sleep with him when he sleeps, wake up with him when he wakes up, and run with him when he runs. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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