Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.2.31: मनुष्य को चाहिए कि वह बुद्धि और विचारों से मानसिक पीड़ा और औषधियों से शारीरिक पीड़ा दूर करे, यही विज्ञान की शक्ति है। उसे बालकों के समान अविवेकपूर्ण आचरण नहीं करना चाहिए ॥31॥ | mahabharat अध्याय 11.2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रज्ञया मानसं दु:खं हन्याच्छारीरमौषधै:।
एतद् विज्ञानसामर्थ्यं न बालै: समतामियात्॥ ३१॥
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि वह बुद्धि और विचारों से मानसिक पीड़ा और औषधियों से शारीरिक पीड़ा दूर करे, यही विज्ञान की शक्ति है। उसे बालकों के समान अविवेकपूर्ण आचरण नहीं करना चाहिए ॥31॥
Man should remove mental pain through intellect and thoughts and physical pain through medicines, this is the power of science. He should not behave irrationally like a child. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥