Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.2.27-28h: यदि तुम अपने में साहस देखो, तो शोक करने के स्थान पर दुःख के कारण को दूर करने का प्रयत्न करो। दुःख दूर करने की सर्वोत्तम औषधि है, उसके विषय में सोचना बंद कर देना, उसके विषय में सोचने से दुःख कम नहीं होता, बल्कि और भी बढ़ जाता है।॥27 1/2॥ | mahabharat अध्याय 11.2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अशोचन् प्रतिकुर्वीत यदि पश्येत् पराक्रमम्।
भैषज्यमेतद् दु:खस्य यदेतन्नानुचिन्तयेत्॥ २७॥
चिन्त्यमानं हि न व्येति भूयश्चापि प्रवर्धते।
अनुवाद
यदि तुम अपने में साहस देखो, तो शोक करने के स्थान पर दुःख के कारण को दूर करने का प्रयत्न करो। दुःख दूर करने की सर्वोत्तम औषधि है, उसके विषय में सोचना बंद कर देना, उसके विषय में सोचने से दुःख कम नहीं होता, बल्कि और भी बढ़ जाता है।॥27 1/2॥
If you see the courage in yourself, then instead of mourning, try to remove the cause of the grief. The best medicine to remove sorrow is to stop thinking about it, thinking about it does not reduce the sorrow, rather it increases even more.॥ 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥