श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  11.2.22 
शोकस्थानसहस्राणि भयस्थानशतानि च।
दिवसे दिवसे मूढमाविशन्ति न पण्डितम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हजारों शोक स्थान और सैकड़ों भय स्थान हैं। वे प्रतिदिन मूर्खों को प्रभावित करते हैं, विद्वानों को नहीं।॥22॥
 
There are thousands of places of grief and hundreds of places of fear. They affect foolish people every day, not learned people.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)