vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 11: स्त्री पर्व
»
अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना
»
श्लोक 20
श्लोक
11.2.20
आत्मानमात्मनाऽऽश्वास्य मा शुच: पुरुषर्षभ।
नाद्य शोकाभिभूतस्त्वं कायमुत्स्रष्टुमर्हसि॥ २०॥
अनुवाद
हे महापुरुष! आपको अपने मन को शांत करना चाहिए और शोक त्याग देना चाहिए। आज शोक में शरीर का त्याग नहीं करना चाहिए।
O great man! You should console your mind and give up your grief. You should not give up your body today in grief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×