श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  11.2.19 
क्षत्रियास्ते महात्मान: शूरा: समितिशोभना:।
आशिष: परमा: प्राप्ता न शोच्या: सर्व एव हि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वे महामनस्वी शूरवीर क्षत्रिय युद्ध में यशस्वी थे, इसलिए उन्होंने अपनी इच्छानुसार उत्तम लोक प्राप्त किए हैं। उनके लिए शोक करना किसी भी प्रकार उचित नहीं है॥19॥
 
Those great-minded valiant Kshatriyas were glorious in the war, therefore they have attained the best worlds according to their desires. It is in no way proper to grieve for them.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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