श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  11.2.18 
एवं राजंस्तवाचक्षे स्वर्ग्यं पन्थानमुत्तमम्।
न युद्धादधिकं किंचित् क्षत्रियस्येह विद्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि क्षत्रिय के लिए इस लोक में स्वर्ग प्राप्ति के लिए धर्मपूर्वक युद्ध करने से बढ़कर कोई उत्तम उपाय नहीं है।
 
O King! That is why I tell you that for a Kshatriya there is no better way to attain heaven in this world than fighting a righteous war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)