श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  11.2.1 
वैशम्पायन उवाच
ततोऽमृतसमैर्वाक्यैर्ह्लादयन् पुरुषर्षभम्।
वैचित्रवीर्यं विदुरो यदुवाच निबोध तत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं, 'हे जनमेजय! तत्पश्चात् विदुरजी ने अमृत के समान मधुर वचनों से महापुरुष धृतराष्ट्र को प्रसन्न करते हुए जो कहा, उसे सुनो।'
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! Thereafter listen to what Vidura said to the great man Dhritarashtra while delighting him with his sweet words which were as sweet as nectar.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)