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mahabharat 11.19.9: श्री कृष्ण! देखो, मेरे इस वीर पुत्र का मुख कितना तेजस्वी है। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि शत्रुओं द्वारा मारे जाने के बाद मेरा यह वीर पुत्र धूल में कैसे पड़ा है।   |   mahabharat अध्याय 11.19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  11.19.9 
शूरस्य हि रणे कृष्ण पश्याननमथेदृशम्।
स कथं निहतोऽमित्रै: पांसून् ग्रसति मे सुत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! देखो, मेरे इस वीर पुत्र का मुख कितना तेजस्वी है। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि शत्रुओं द्वारा मारे जाने के बाद मेरा यह वीर पुत्र धूल में कैसे पड़ा है।
 
Sri Krishna! See how radiant is the face of this brave son of mine. I wonder how this brave son of mine is lying in the dust after being killed by the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)