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mahabharat 11.19.6: युद्ध में बाणों, भालों और बाणों के प्रहार से उसके प्राण छिद गए हैं। फिर भी धन की देवी (लक्ष्मी) ने इस वीर योद्धा का शरीर नहीं छोड़ा है। ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 11.19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  11.19.6 
कर्णिनालीकनाराचैर्भिन्नमर्माणमाहवे।
अद्यापि न जहात्येनं लक्ष्मीर्भरतसत्तमम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में बाणों, भालों और बाणों के प्रहार से उसके प्राण छिद गए हैं। फिर भी धन की देवी (लक्ष्मी) ने इस वीर योद्धा का शरीर नहीं छोड़ा है। ॥6॥
 
In the war his vital parts have been pierced by the blows of arrows, spears and arrows. But even then the goddess of wealth (Lakshmi) has not left the body of this brave warrior. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)