Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.19.17: 17. श्री कृष्ण! देखो, विविंशतिका का मुख अत्यंत तेजस्वी है, उसके अधरों पर मुस्कान खेल रही है, उसकी नासिका मनोहर है और उसकी भौहें सुन्दर हैं। यह मुख चन्द्रमा के समान शोभायमान हो रहा है। | mahabharat अध्याय 11.19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
17. श्री कृष्ण! देखो, विविंशतिका का मुख अत्यंत तेजस्वी है, उसके अधरों पर मुस्कान खेल रही है, उसकी नासिका मनोहर है और उसकी भौहें सुन्दर हैं। यह मुख चन्द्रमा के समान शोभायमान हो रहा है।
Sri Krishna! Look, the face of Vivinshatika is very bright, a smile is playing on its lips, the nose is charming and the eyebrows are beautiful. This face is looking beautiful like the moon. 17.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥