श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.19.14 
युवा वृन्दारको नित्यं प्रवरस्त्रीनिषेवित:।
विविंशतिरसौ शेते ध्वस्त: पांसुषु माधव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
माधव! देखो! वह देवतुल्य युवक विविंशति, जो सदैव सुन्दर स्त्रियों से सेवित रहता था, आज नष्ट होकर धूल में पड़ा हुआ है॥14॥
 
Madhava! Look! that god-like young man Vivinshati, who was always served by beautiful women, is today lying devastated and in the dust. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)