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mahabharat 11.18.3: वह रत्नजटित पैरों के साथ महल की मीनारों में विचरण करती थी; किन्तु आज विपत्ति से त्रस्त होकर वह रक्त से लथपथ पृथ्वी को छू रही है।   |   mahabharat अध्याय 11.18: अपने अन्य पुत्रों तथा दु:शासनको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 18: अपने अन्य पुत्रों तथा दु:शासनको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  11.18.3 
प्रासादतलचारिण्यश्चरणैर्भूषणान्वितै:।
आपन्ना यत् स्पृशन्तीमां रुधिरार्द्रां वसुन्धराम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह रत्नजटित पैरों के साथ महल की मीनारों में विचरण करती थी; किन्तु आज विपत्ति से त्रस्त होकर वह रक्त से लथपथ पृथ्वी को छू रही है।
 
She used to roam in the palace's towers with her feet adorned with jewels; but today, struck by adversity, she is touching the earth soaked in blood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)