श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 18: अपने अन्य पुत्रों तथा दु:शासनको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  11.18.28 
अत्यर्थमकरोद् रौद्रं भीमसेनोऽत्यमर्षण:।
दु:शासनस्य यत् क्रुद्धोऽपिबच्छोणितमाहवे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन ने अत्यन्त क्रोध में भरकर युद्धभूमि में क्रोधपूर्वक दु:शासन का रक्त पी लिया; यह अत्यन्त भयंकर कर्म है।
 
Bhimasena, filled with great resentment, drank the blood of Dushasan in a fit of rage on the battlefield; this is a terrible deed.
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि स्त्रीविलापपर्वणि गान्धारीवाक्येऽष्टादशोऽध्याय:॥ १८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत स्त्रीविलापपर्वमें गान्धारीवाक्यविषयक अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)