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mahabharat 11.18.16: वासुदेव! आज सामान्य लोग मेरे ईर्ष्यालु पुत्रों की इन रानियों को देख रहे हैं, जो मदमस्त हाथियों के समान गर्व से भरी हुई हैं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 11.18: अपने अन्य पुत्रों तथा दु:शासनको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 18: अपने अन्य पुत्रों तथा दु:शासनको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  11.18.16 
ईर्षूणां मम पुत्राणां वासुदेवावरोधनम्।
मत्तमातङ्गदर्पाणां पश्यन्त्यद्य पृथग्जना:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वासुदेव! आज सामान्य लोग मेरे ईर्ष्यालु पुत्रों की इन रानियों को देख रहे हैं, जो मदमस्त हाथियों के समान गर्व से भरी हुई हैं॥16॥
 
Vasudev! Today, ordinary people are seeing these queens of my jealous sons, who are full of pride like intoxicated elephants. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)