श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 18: अपने अन्य पुत्रों तथा दु:शासनको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.18.10 
अन्यां चापहृतं कायाच्चारुकुण्डलमुन्नसम्।
स्वस्य बन्धो: शिर: कृष्ण गृहीत्वा पश्य तिष्ठतीम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! देखो, वह दूसरी स्त्री सुन्दर कुण्डलों से सुसज्जित और ऊँची नाक वाली अपने किसी निकट सम्बन्धी का कटा हुआ सिर लिए खड़ी है॥10॥
 
Sri Krishna! Look, the other woman is standing there holding the severed head of a close relative adorned with beautiful earrings and with a high nose. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)