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mahabharat 11.17.29-30: "पता नहीं यह बुद्धिमान पुत्रवधू अपने पुत्र के लिए विलाप कर रही है या अपने पति के लिए। उसकी भी यही दशा है। माधव! देखो, वह विशाल नेत्रों वाली वधू अपने पुत्र को देखकर अपने वीर पति, कौरवराज की छाती पर गिर पड़ी है और दोनों हाथों से सिर पीट रही है।"   |   mahabharat अध्याय 11.17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  11.17.29-30 
किं नु शोचति भर्तारं पुत्रं चैषा मनस्विनी।
तथा ह्यवस्थिता भाति पुत्रं चाप्यभिवीक्ष्य सा॥ २९॥
स्वशिर: पञ्चशाखाभ्यामभिहत्यायतेक्षणा।
पतत्युरसि वीरस्य कुरुराजस्य माधव॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
"पता नहीं यह बुद्धिमान पुत्रवधू अपने पुत्र के लिए विलाप कर रही है या अपने पति के लिए। उसकी भी यही दशा है। माधव! देखो, वह विशाल नेत्रों वाली वधू अपने पुत्र को देखकर अपने वीर पति, कौरवराज की छाती पर गिर पड़ी है और दोनों हाथों से सिर पीट रही है।"
 
‘I don't know whether this intelligent daughter-in-law is mourning for her son or her husband. She seems to be in a similar state. Madhava! Look there, that huge-eyed bride, looking at her son, has fallen on the chest of her brave husband, the King of Kurus, beating her head with both hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)