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mahabharat 11.17.27: मेरा पुत्र युद्धभूमि में अपने पुत्र के साथ मारा गया है। उसे इस अवस्था में देखकर मेरा हृदय सैकड़ों टुकड़ों में क्यों नहीं टूट जाता?॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 11.17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  11.17.27 
कथं तु शतधा नेदं हृदयं मम दीर्यते।
पश्यन्त्या निहतं पुत्रं पुत्रेण सहितं रणे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मेरा पुत्र युद्धभूमि में अपने पुत्र के साथ मारा गया है। उसे इस अवस्था में देखकर मेरा हृदय सैकड़ों टुकड़ों में क्यों नहीं टूट जाता?॥ 27॥
 
'My son has been killed along with his own son on the battlefield. Why doesn't my heart break into hundreds of pieces on seeing him in this condition?॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)