Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.17.25: हे कृष्ण! लक्ष्मण की माता को तो देखो, जो स्वर्ण वेदी के समान कान्तिमान और सुन्दर कटि वाली हैं, तथा दुर्योधन की शुभ गोद में बैठी हुई केश खोले हुए विलाप कर रही हैं। | mahabharat अध्याय 11.17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रकीर्णकेशां सुश्रोणीं दुर्योधनशुभाङ्कगाम्।
रुक्मवेदीनिभां पश्य कृष्ण लक्ष्मणमातरम्॥ २५॥
अनुवाद
हे कृष्ण! लक्ष्मण की माता को तो देखो, जो स्वर्ण वेदी के समान कान्तिमान और सुन्दर कटि वाली हैं, तथा दुर्योधन की शुभ गोद में बैठी हुई केश खोले हुए विलाप कर रही हैं।
Sri Krishna! Look at Lakshman's mother, who is as radiant as a golden altar and has a beautiful waist, who is placed in the auspicious lap of Duryodhan and is crying with her hair open.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥