श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  11.17.23 
तामेवाद्य महाबाहो पश्याम्यन्यानुशासिताम्।
हीनां हस्तिगवाश्वेन किं नु जीवामि माधव॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु माधव! आज मैं देखता हूँ कि यह पृथ्वी दूसरों के अधीन हो गई है और हाथी, घोड़े और गायों से रहित हो गई है; फिर मैं क्यों जीवित रहूँ?॥ 23॥
 
'Mahabahu Madhava! Today I see that this very earth has come under the rule of others and has become devoid of elephants, horses and cows; then why should I continue to live?॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)