Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.17.2-3: होश आने पर वह रोने लगी और अपने पुत्र को पुकारने लगी। दुर्योधन को रक्त से लथपथ पड़ा देखकर गांधारी ने उसे गले लगा लिया और करुण स्वर में विलाप करने लगी। उसकी सारी इन्द्रियाँ व्याकुल हो गईं। वह शोक से विह्वल होकर 'हे पुत्र! हे पुत्र!' कहकर रोने लगी॥ 2-3॥ | mahabharat अध्याय 11.17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सा तु लब्ध्वा पुन: संज्ञां विक्रुश्य च विलप्य च।
दुर्योधनमभिप्रेक्ष्य शयानं रुधिरोक्षितम्॥ २॥
परिष्वज्य च गान्धारी कृपणं पर्यदेवयत्।
हा हा पुत्रेति शोकार्ता विललापाकुलेन्द्रिया॥ ३॥
अनुवाद
होश आने पर वह रोने लगी और अपने पुत्र को पुकारने लगी। दुर्योधन को रक्त से लथपथ पड़ा देखकर गांधारी ने उसे गले लगा लिया और करुण स्वर में विलाप करने लगी। उसकी सारी इन्द्रियाँ व्याकुल हो गईं। वह शोक से विह्वल होकर 'हे पुत्र! हे पुत्र!' कहकर रोने लगी॥ 2-3॥
On regaining consciousness, she started crying and calling out for her son. Seeing Duryodhan lying soaked in blood, Gandhari embraced him and started crying pitifully. All her senses were disturbed. Overwhelmed with grief, she started crying, saying, 'Oh son! Oh son!'॥ 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥