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श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  11.16.59 
इतो दु:खतरं किं नु केशव प्रतिभाति मे।
यदिमा: कुर्वते सर्वा रवमुच्चावचं स्त्रिय:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
केशव! मेरे लिए इससे अधिक दुःख की बात और क्या हो सकती है कि ये सब बहुएँ यहाँ आकर तरह-तरह से विलाप कर रही हैं?
 
'Keshav! What could be more painful for me than the fact that all these daughters-in-law have come here and are wailing in so many ways?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)