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mahabharat 11.16.57: ये पतिव्रता, गुणवती और सुन्दरी स्त्रियाँ पहले कभी ऐसी दुर्गति को प्राप्त नहीं हुई थीं; किन्तु आज वे दुःख के सागर में डूब रही हैं। सम्पूर्ण पृथ्वी उनके भाइयों, पतियों और पुत्रों से आच्छादित है॥ 57॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  11.16.57 
न दु:खेषूचिता: पूर्वं दु:खं गाहन्त्यनिन्दिता:।
भ्रातृभि: पतिभि: पुत्रैरुपाकीर्णा वसुंधरा॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
ये पतिव्रता, गुणवती और सुन्दरी स्त्रियाँ पहले कभी ऐसी दुर्गति को प्राप्त नहीं हुई थीं; किन्तु आज वे दुःख के सागर में डूब रही हैं। सम्पूर्ण पृथ्वी उनके भाइयों, पतियों और पुत्रों से आच्छादित है॥ 57॥
 
‘These chaste, virtuous and beautiful women had never suffered such misery before; but today they are drowning in the ocean of misery. The whole earth is covered with their brothers, husbands and sons.॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)