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mahabharat 11.16.55: मधुसूदन! देखो, बहुत सी स्त्रियाँ अपने भाइयों, पिताओं, पुत्रों और पतियों को शत्रुओं द्वारा मारा हुआ देखकर अपने सिर पर हाथ मार रही हैं।   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  11.16.55 
पाणिभिश्चापरा घ्नन्ति शिरांसि मधुसूदन।
प्रेक्ष्य भ्रातॄन् पितॄन् पुत्रान् पतींश्च निहतान् परै:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! देखो, बहुत सी स्त्रियाँ अपने भाइयों, पिताओं, पुत्रों और पतियों को शत्रुओं द्वारा मारा हुआ देखकर अपने सिर पर हाथ मार रही हैं।
 
'Madhusudana! Look, many women are beating their heads with their hands on seeing their brothers, fathers, sons and husbands killed by the enemies. 55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)