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mahabharat 11.16.48: ये वीर स्त्रियाँ गहरी साँसें लेती हुई, अपने स्वजनों को पुकारती हुई, करुण विलाप करती हुई, शोक से तड़पती हुई अपने प्राण त्यागना चाहती हैं॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  11.16.48 
एता दीर्घमिवोच्छ्वस्य विक्रुश्य च विलप्य च।
विस्पन्दमाना दु:खेन वीरा जहति जीवितम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
ये वीर स्त्रियाँ गहरी साँसें लेती हुई, अपने स्वजनों को पुकारती हुई, करुण विलाप करती हुई, शोक से तड़पती हुई अपने प्राण त्यागना चाहती हैं॥ 48॥
 
‘These brave women, drawing deep breaths and calling out to their relatives, wailing pitifully and writhing in grief, want to give up their lives.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)