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mahabharat 11.16.47: उनके विलाप का अर्थ पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता, क्योंकि वे एक-दूसरे के विलाप के साथ मिल जाते हैं; यहां तक ​​कि अन्य स्त्रियां भी उन्हें सुनकर कुछ समझ नहीं पातीं।   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  11.16.47 
आसामपरिपूर्णार्थं निशम्य परिदेवितम्।
इतरेतरसंक्रन्दान्न विजानन्ति योषित:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
उनके विलाप का अर्थ पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता, क्योंकि वे एक-दूसरे के विलाप के साथ मिल जाते हैं; यहां तक ​​कि अन्य स्त्रियां भी उन्हें सुनकर कुछ समझ नहीं पातीं।
 
'The meaning of their wailings cannot be fully understood because they mix with each other's cries; even the other women are unable to understand anything after hearing them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)