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श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  11.16.43 
रक्तोत्पलवनानीव विभान्ति रुचिराणि च।
मुखानि परमस्त्रीणां परिशुष्काणि केशव॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
केशव! इन सुन्दरियों के सूखे हुए सुन्दर मुख लाल कमलों के समूह के समान शोभायमान हो रहे हैं।
 
'Keshav! The dried up beautiful faces of these beauties look beautiful like a cluster of red lotuses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)