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mahabharat 11.16.41-42: वृष्णिसिंह! प्रत्येक रात्रि के लगभग अंतिम प्रहर में सुशिक्षित बंदीगण अपनी उत्तम प्रार्थनाओं और उपचारों से इन्हें प्रसन्न करते थे; आज ये सुन्दर कन्याएँ शोक और शोक से पीड़ित होकर उनके सामने करुण विलाप कर रही हैं ॥41-42॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  11.16.41-42 
सर्वेष्वपररात्रेषु याननन्दन्त बन्दिन:।
स्तुतिभिश्च परार्घ्याभिरुपचारैश्च शिक्षिता:॥ ४१॥
तानिमा: परिदेवन्ति दु:खार्ता: परमाङ्गना:।
कृपणं वृष्णिशार्दूल दु:खशोकार्दिता भृशम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वृष्णिसिंह! प्रत्येक रात्रि के लगभग अंतिम प्रहर में सुशिक्षित बंदीगण अपनी उत्तम प्रार्थनाओं और उपचारों से इन्हें प्रसन्न करते थे; आज ये सुन्दर कन्याएँ शोक और शोक से पीड़ित होकर उनके सामने करुण विलाप कर रही हैं ॥41-42॥
 
'Vrishni Singh! Almost in the last hour of each night, the well-educated prisoners used to please them with their best prayers and remedies; today these beautiful girls, afflicted with grief and sorrow, are wailing pitifully in front of them. ॥ 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)