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mahabharat 11.16.3: पुण्यात्मा महर्षि व्यास के वरदान से वह दिव्य ज्ञान की शक्ति से संपन्न थी; अतः युद्धभूमि का दृश्य देखकर वह अनेक प्रकार से विलाप करने लगी॥3॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  11.16.3 
वरदानेन कृष्णस्य महर्षे: पुण्यकर्मण:।
दिव्यज्ञानबलोपेता विविधं पर्यदेवयत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पुण्यात्मा महर्षि व्यास के वरदान से वह दिव्य ज्ञान की शक्ति से संपन्न थी; अतः युद्धभूमि का दृश्य देखकर वह अनेक प्रकार से विलाप करने लगी॥3॥
 
By the blessing of the virtuous Maharishi Vyas, she was endowed with the power of divine knowledge; Therefore, after seeing the scene of the battlefield, she started mourning in many ways. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)