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mahabharat 11.16.28: कौन सोच सकता था कि जयद्रथ, कर्ण, द्रोणाचार्य, भीष्म और अभिमन्यु जैसे वीर इस युद्ध में नष्ट हो जायेंगे? 28॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  11.16.28 
जयद्रथस्य कर्णस्य तथैव द्रोणभीष्मयो:।
अभिमन्योर्विनाशं च कश्चिन्तयितुमर्हति॥ २८॥
 
 
अनुवाद
कौन सोच सकता था कि जयद्रथ, कर्ण, द्रोणाचार्य, भीष्म और अभिमन्यु जैसे वीर इस युद्ध में नष्ट हो जायेंगे? 28॥
 
'Who could have imagined that heroes like Jayadratha, Karna, Dronacharya, Bhishma and Abhimanyu would be destroyed in this war? 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)