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mahabharat 11.16.27: रक्त से लथपथ गरुड़ और गिद्ध उन वीरों को इधर-उधर घसीट रहे हैं। हजारों गिद्ध उनके पैर पकड़कर उन्हें खा रहे हैं॥27॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  11.16.27 
तान् सुपर्णाश्च गृध्राश्च कर्षयन्त्यसृगुक्षिता:।
विगृह्य चरणैर्गृध्रा भक्षयन्ति सहस्रश:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
रक्त से लथपथ गरुड़ और गिद्ध उन वीरों को इधर-उधर घसीट रहे हैं। हजारों गिद्ध उनके पैर पकड़कर उन्हें खा रहे हैं॥27॥
 
‘The eagles and vultures soaked in blood are dragging those heroes here and there. Thousands of vultures are catching hold of their feet and eating them.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)