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mahabharat 11.16.23-25: कहीं योद्धाओं की भुजाओं से छूटे हुए भाले पड़े हैं, कहीं परिघ, नाना प्रकार की तीक्ष्ण तलवारें और बाणों से युक्त धनुष पड़े हैं। कहीं मांसभक्षी पशुओं के झुंड हर्षित होकर एक साथ खड़े हैं, कहीं वे क्रीड़ा कर रहे हैं और कहीं अन्य पशु सो रहे हैं। वीर! प्रभु! इन सब लोगों से भरी हुई इस रणभूमि को देखिये। जनार्दन! इसे देखकर मैं शोक से जल रहा हूँ॥ 23-25॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 23-25
 
 
श्लोक  11.16.23-25 
वीरबाहुविसृष्टाभि: शक्तिभि: परिघैरपि।
खड्गैश्च विविधैस्तीक्ष्णै: सशरैश्च शरासनै:॥ २३॥
क्रव्यादसंघैर्मुदितैस्तिष्ठद्भि: सहितै: क्वचित्।
क्वचिदाक्रीडमानैश्च शयानैश्चापरै: क्वचित्॥ २४॥
एतदेवंविधं वीर सम्पश्यायोधनं विभो।
पश्यमाना हि दह्यामि शोकेनाहं जनार्दन॥ २५॥
 
 
अनुवाद
कहीं योद्धाओं की भुजाओं से छूटे हुए भाले पड़े हैं, कहीं परिघ, नाना प्रकार की तीक्ष्ण तलवारें और बाणों से युक्त धनुष पड़े हैं। कहीं मांसभक्षी पशुओं के झुंड हर्षित होकर एक साथ खड़े हैं, कहीं वे क्रीड़ा कर रहे हैं और कहीं अन्य पशु सो रहे हैं। वीर! प्रभु! इन सब लोगों से भरी हुई इस रणभूमि को देखिये। जनार्दन! इसे देखकर मैं शोक से जल रहा हूँ॥ 23-25॥
 
‘Somewhere the spears released from the arms of the warriors are lying, somewhere Parigha, various kinds of sharp swords and bows with arrows are lying. Somewhere herds of carnivorous animals are standing together in joy, somewhere they are playing and somewhere other animals are sleeping. Brave! Lord! Look at this battlefield filled with all these people. Janardan! I am burning with grief on seeing this.॥ 23-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)