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mahabharat 11.16.16-17: वह अत्यन्त भयंकर युद्धभूमि शोक से व्याकुल कन्याओं के करुण क्रन्दन से सर्वत्र गूंज उठी। यह देखकर धर्म को जानने वाली सुबलपुत्री गांधारी ने कौरवों के विनाश को देखते हुए कमलनेत्र श्रीकृष्ण को संबोधित करते हुए कहा - 16-17॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  11.16.16-17 
दु:खोपहतचित्ताभि: समन्तादनुनादितम्।
दृष्ट्वाऽऽयोधनमत्युग्रं धर्मज्ञा सुबलात्मजा॥ १६॥
तत: सा पुण्डरीकाक्षमामन्त्र्य पुरुषोत्तमम्।
कुरूणां वैशसं दृष्ट्वा इदं वचनमब्रवीत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वह अत्यन्त भयंकर युद्धभूमि शोक से व्याकुल कन्याओं के करुण क्रन्दन से सर्वत्र गूंज उठी। यह देखकर धर्म को जानने वाली सुबलपुत्री गांधारी ने कौरवों के विनाश को देखते हुए कमलनेत्र श्रीकृष्ण को संबोधित करते हुए कहा - 16-17॥
 
That most terrible battlefield echoed everywhere with the pitiful cries of girls distraught with grief. Seeing this, Subal's daughter Gandhari, who knew religion, addressed the lotus-eyed Shri Krishna and said while looking at the destruction of the Kauravas - 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)