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mahabharat 11.16.15: थकी हुई और अनाथ पांचाल और कौरव स्त्रियाँ अपनी सुध-बुध खो बैठी थीं। उनकी हालत बहुत दयनीय थी।   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  11.16.15 
श्रान्तानां चाप्यनाथानां नासीत् काचन चेतना।
पाञ्चालकुरुयोषाणां कृपणं तदभून्महत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
थकी हुई और अनाथ पांचाल और कौरव स्त्रियाँ अपनी सुध-बुध खो बैठी थीं। उनकी हालत बहुत दयनीय थी।
 
The exhausted and orphaned Panchala and Kaurava women had lost their senses. They were in a very pitiable state.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)