Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.15.43-44: जब यह विनाश किसी भी प्रकार टाला नहीं जा सका, विशेषकर जब सब कुछ समाप्त हो गया है, तब अब तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। वे सभी वीर युद्ध में मारे जा चुके हैं, अतः वे शोक करने योग्य नहीं हैं। आज तुम्हारी भी वही स्थिति है जो मेरी है। हम दोनों को कौन सांत्वना देगा? मेरे ही अपराध के कारण इस महान कुल का नाश हुआ है।'॥43-44॥ | mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मिन्नपरिहार्येऽर्थे व्यतीते च विशेषत:॥ ४३॥
मा शुचो न हि शोच्यास्ते संग्रामे निधनं गता:।
यथैवाहं तथैव त्वं को नावाश्वासयिष्यति।
ममैव ह्यपराधेन कुलमग्रॺं विनाशितम्॥ ४४॥
अनुवाद
जब यह विनाश किसी भी प्रकार टाला नहीं जा सका, विशेषकर जब सब कुछ समाप्त हो गया है, तब अब तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। वे सभी वीर युद्ध में मारे जा चुके हैं, अतः वे शोक करने योग्य नहीं हैं। आज तुम्हारी भी वही स्थिति है जो मेरी है। हम दोनों को कौन सांत्वना देगा? मेरे ही अपराध के कारण इस महान कुल का नाश हुआ है।'॥43-44॥
‘When this destruction could not be averted in any way, especially when everything is over, you should not mourn now. All those brave men have been killed in the war, so they are not worth mourning. Today you are the same as I am. Who will console both of us? It is my crime that has led to the destruction of this great family.’॥ 43-44॥
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि पृथापुत्रदर्शने पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें कुन्तीको अपने पुत्रोंका दर्शनविषयक पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥