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mahabharat 11.15.35-36: कुंती अपने पुत्रों के शवों को एक-एक करके बार-बार छूती हुई दुःख से विह्वल हो गई और द्रौपदी के लिए विलाप करने लगी, जिसके सभी पुत्र मारे जा चुके थे। तभी उसने देखा कि द्रौपदी पास ही ज़मीन पर रो रही है।   |   mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  11.15.35-36 
सा तानेकैकश: पुत्रान् संस्पृशन्ती पुन: पुन:॥ ३५॥
अन्वशोचत दु:खार्ता द्रौपदीं च हृतात्मजाम्।
रुदतीमथ पाञ्चालीं ददर्श पतितां भुवि॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
कुंती अपने पुत्रों के शवों को एक-एक करके बार-बार छूती हुई दुःख से विह्वल हो गई और द्रौपदी के लिए विलाप करने लगी, जिसके सभी पुत्र मारे जा चुके थे। तभी उसने देखा कि द्रौपदी पास ही ज़मीन पर रो रही है।
 
Kunti, while repeatedly touching the bodies of her sons one by one, was overwhelmed with grief and started mourning for Draupadi, whose sons had all been killed. Just then she saw that Draupadi was crying on the ground nearby.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)