Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 11.15.33-34h: कुंतीदेवी बहुत समय बाद अपने पुत्रों को देखकर और उनके कष्टों को याद करके करुणा से भर गईं और अपने पल्लू से अपना चेहरा ढककर रोने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  11.15.33-34h 
चिरस्य दृष्ट्वा पुत्रान् सा पुत्राधिभिरभिप्लुता॥ ३३॥
बाष्पमाहारयद् देवी वस्त्रेणावृत्य वै मुखम्।
 
 
अनुवाद
कुंतीदेवी बहुत समय बाद अपने पुत्रों को देखकर और उनके कष्टों को याद करके करुणा से भर गईं और अपने पल्लू से अपना चेहरा ढककर रोने लगीं।
 
Kuntidevi, on seeing her sons after a long time and remembering their sufferings, was filled with compassion and began to cry, covering her face with her pallu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)