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mahabharat 11.15.28: जब राजा युधिष्ठिर ने निकट आकर भयभीत होकर ये बातें कहीं, तब देवी गान्धारी जोर-जोर से साँस लेती हुई सिसकने लगीं। वे कुछ भी न बोल सकीं॥28॥   |   mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  11.15.28 
तमेवंवादिनं भीतं संनिकर्षगतं तदा।
नोवाच किंचिद् गान्धारी नि:श्वासपरमा भृशम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब राजा युधिष्ठिर ने निकट आकर भयभीत होकर ये बातें कहीं, तब देवी गान्धारी जोर-जोर से साँस लेती हुई सिसकने लगीं। वे कुछ भी न बोल सकीं॥28॥
 
When King Yudhishthira came near and said these things in fear, then Goddess Gandhari started sobbing while breathing loudly. She could not say anything.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)