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mahabharat 11.15.23: हे भाई! तुम मेरे सभी पुत्रों के लिए मृत्यु-राज बन गए। यदि तुम धर्म के मार्ग पर चलते और मेरा एक भी पुत्र जीवित रहता, तो मुझे इतना दुःख न होता। 23.   |   mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  11.15.23 
शेषे ह्यवस्थिते तात पुत्राणामन्तके त्वयि।
न मे दु:खं भवेदेतद् यदि त्वं धर्ममाचरे:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे भाई! तुम मेरे सभी पुत्रों के लिए मृत्यु-राज बन गए। यदि तुम धर्म के मार्ग पर चलते और मेरा एक भी पुत्र जीवित रहता, तो मुझे इतना दुःख न होता। 23.
 
O dear brother! You became the death-king for all my sons. If you had followed the path of Dharma and even one of my sons had survived, I would not have been so sad. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)