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mahabharat 11.15.10: रानी! आपके पुत्र ने घृणा की आग में घी डालकर हमें वन में भेज दिया और हमें निरन्तर कष्ट दिया; इसीलिए हमने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया है।   |   mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.15.10 
वैरमुद्दीपितं राज्ञि पुत्रेण तव तन्महत्।
क्लेशिताश्च वने नित्यं तत एतत् कृतं मया॥ १०॥
 
 
अनुवाद
रानी! आपके पुत्र ने घृणा की आग में घी डालकर हमें वन में भेज दिया और हमें निरन्तर कष्ट दिया; इसीलिए हमने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया है।
 
Queen! Your son added fuel to the fire of hatred and sent us to the forest and caused us constant pain; that is why we have treated him like this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)