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mahabharat 11.14.9: इस प्रकार जब विजय की इच्छा रखनेवाला दुर्योधन समय-समय पर आपसे प्रार्थना करता था, तब आप सदैव यही उत्तर देते थे कि, “जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है।”॥9॥   |   mahabharat अध्याय 11.14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  11.14.9 
सा तथा याच्यमाना त्वं काले काले जयैषिणा।
उक्तवत्यसि गान्धारि यतो धर्मस्ततो जय:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जब विजय की इच्छा रखनेवाला दुर्योधन समय-समय पर आपसे प्रार्थना करता था, तब आप सदैव यही उत्तर देते थे कि, “जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है।”॥9॥
 
‘Thus, when Duryodhana, desirous of victory, prayed to you from time to time, you always replied, “Where there is Dharma, there is victory.”॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)