श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  11.14.21 
कथं नु धर्मं धर्मज्ञै: समुद्दिष्टं महात्मभि:।
त्यजेयुराहवे शूरा: प्राणहेतो: कथंचन॥ २१॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में अपने प्राण बचाने के लिए कोई वीर योद्धा विद्वान ऋषियों द्वारा प्रतिपादित धर्म को गदायुद्ध के लिए कैसे त्याग सकता है?
 
How can a valiant warrior abandon the Dharma (righteousness) propounded by the learned sages for mace-fighting, just to save his life on the battlefield?
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि गान्धारीसान्त्वनायां चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें गान्धारीकी सान्त्वनाविषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)