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युद्धभूमि में अपने प्राण बचाने के लिए कोई वीर योद्धा विद्वान ऋषियों द्वारा प्रतिपादित धर्म को गदायुद्ध के लिए कैसे त्याग सकता है?
How can a valiant warrior abandon the Dharma (righteousness) propounded by the learned sages for mace-fighting, just to save his life on the battlefield?
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि जलप्रदानिकपर्वणि गान्धारीसान्त्वनायां चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत जलप्रदानिकपर्वमें गान्धारीकी सान्त्वनाविषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥