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mahabharat 11.14.17: इसमें न तो अर्जुन का दोष है, न कुन्तीपुत्र भीमसेन का। इसमें नकुल, सहदेव और युधिष्ठिर को कभी दोष नहीं दिया जा सकता। 17॥   |   mahabharat अध्याय 11.14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  11.14.17 
नापराध्यति बीभत्सुर्न च पार्थो वृकोदर:।
नकुल: सहदेवश्च नैव जातु युधिष्ठिर:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इसमें न तो अर्जुन का दोष है, न कुन्तीपुत्र भीमसेन का। इसमें नकुल, सहदेव और युधिष्ठिर को कभी दोष नहीं दिया जा सकता। 17॥
 
There is neither Arjun's fault nor Kunti's son Bhimsen's fault in this. Nakul, Sahadev and Yudhishthir can never be blamed for this. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)