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mahabharat 11.14.13: हे बुद्धिमान गान्धारी! अपने धर्म और वचनों का स्मरण करो और क्रोध करना छोड़ दो। हे सत्यवती! तुम्हें फिर ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 11.14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  11.14.13 
स्वं च धर्मं परिस्मृत्य वाचं चोक्तां मनस्विनि।
कोपं संयच्छ गान्धारि मैवं भू: सत्यवादिनि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे बुद्धिमान गान्धारी! अपने धर्म और वचनों का स्मरण करो और क्रोध करना छोड़ दो। हे सत्यवती! तुम्हें फिर ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए।॥13॥
 
‘O wise Gandhari! Remember your dharma and your words and stop being angry. O truthful one! You should not behave like this again.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)