Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.14.12: धर्मज्ञ! तुम पहले बड़े क्षमाशील थे। अब क्षमा क्यों नहीं करते? अधर्म का त्याग कर दो, क्योंकि जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है॥ 12॥ | mahabharat अध्याय 11.14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षमाशीला पुरा भूत्वा साद्य न क्षमसे कथम्।
अधर्मं जहि धर्मज्ञे यतो धर्मस्ततो जय:॥ १२॥
अनुवाद
धर्मज्ञ! तुम पहले बड़े क्षमाशील थे। अब क्षमा क्यों नहीं करते? अधर्म का त्याग कर दो, क्योंकि जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है॥ 12॥
‘Dharmagya! You were very forgiving earlier. Why don't you forgive now? Give up unrighteousness, because where there is righteousness, there is victory.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥