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mahabharat 11.14.10: गान्धारी! मुझे स्मरण नहीं आता कि तुमने पहले कभी बातचीत में झूठ बोला हो और तुम सदैव प्राणियों की सहायता करने में तत्पर रही हो॥10॥   |   mahabharat अध्याय 11.14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 14: पाण्डवोंको शाप देनेके लिये उद्यत हुई गान्धारीको व्यासजीका समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.14.10 
न चाप्यतीतां गान्धारि वाचं ते वितथामहम्।
स्मरामि भाषमाणायास्तथा प्राणिहिता ह्यसि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
गान्धारी! मुझे स्मरण नहीं आता कि तुमने पहले कभी बातचीत में झूठ बोला हो और तुम सदैव प्राणियों की सहायता करने में तत्पर रही हो॥10॥
 
'Gandhari! I do not remember you having ever told a lie in the context of conversation before and you have always been ready to help the living beings.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)